रोचक कहानी चार रुपये Rochak Kahani Char Rupe in Hindi

मैं आपको एक रोचक कहानी के बारे में बताता हूँ जिस समय एक रुपए की बहुत ज्यादा कीमत थी और लोग एक आने दो आने में मजदूरी किया करते थें। यह RK नारायण जी द्वारा लिखी गई हैरोचक कहानी चार रुपये Rochak Kahani Char Rupey

एक गाँव में एक बहुत आलसी आदमी जिसका नाम रंगा अपनी पत्नी के साथ रहता था कोई भी काम नहीं करता था और हमेशा ऐसा सोचता था कि कुछ भी ना करना पड़े और सारे काम हो जाये और उसकी पत्नी भी उससे बहुत परेशान थी काम पर भी ना जाता और घर पर ही पड़ा रहता। 

रोज के दिनचर्या की तरह मुर्गें ने बाग़ दी और सूरज भी सिर पर निकल आया उसके बावजूद रंगा ने चादर मुहँ से निकाली और फिर सूरज की और देखकर चादर से मुहँ ढका और सो गया

रंगा का फिर सो जाना
रंगा का फिर सो जाना

रंगा की पत्नी “हूअ घोड़ें बेच कर सो रहा है, बस-बस यह नाटक बंद करों, कितने देर और सोना है, उठो

बड़ी मुश्किल से रंगा उठा और बोला “मुझे एक गर्म-गर्म काफी पिला दे, मैं आराम से उठ जाउंगा

पत्नी “सुन लो साहब को काफी चाहिये, काफी, हूअ, पिछले चार दिनों से एक पैसा-तक तो नहीं कमाया और इन्हें काफी चाहिये घर में ना चावल है और ना ही नमक आज मेरी माँ ना होती तो पेट पर पत्थर रखकर सो जाते   

रंगा “बहुत हो गया मुझे तेरी बक-बक नहीं सुननी, समझी, एक कप काफी नहीं दें सकती तो गर्म पानी ही दे दें”  

पत्नी “लकड़ी नहीं है”   

रंगा “मुझे पता है पानी धुप में रख दे अपने आप गर्म हो जाएगा समझी”   


रंगा का मुश्किल से नींद लेकर उठना

वो बड़ी मुश्किल से उठा और नीम की दातुन लेकर दांत साफ़ करने लगा और पानी के कुँए के पास जाकर किसी ओर की भरी हुई पानी की बाल्टी से पानी लेकर कुल्ला करने लगा और फिर उसके बाद घर पंहुचा             

पत्नी “सुनों मैंने बाजु के घर से उधार मांगकर तूम्हारे लिए थोड़ी-सी काफी बनाई है।“

रंगा खुश होते हुए “अच्छा”

पत्नी “जब तुम शाम को काम से वापस लोटोगे तो उन्हें वापस कर देंगें।“

रंगा और उसकी पत्नी
रंगा और उसकी पत्नी

काम का नाम सुनते ही जैसे रामू के सिर पर किसी ने बड़ा-सा बोझ रख दिया हो

रंगा “काम कैसा काम?”

पत्नी “कुछ-भी, कहीं भी जाओ, कोई–भी काम करो और कमाकर लाओं, पेड़ पर नारियल तोड़ कर भी कमा सकते हो।“



रंगा नारियल, उतने ऊँचें पेड़ पर चड़कर।“

पत्नी “वो नहीं तो कुछ और करना, अब जल्दी तैयार हो जाओ और निकलो, माँ बाहर गई है उसके आने से पहले निकलो बाहर, वरना लकड़ी लेकर भगायेगी।“

घर से बाहर रंगा का काम की तलाश में जाना

माँ का नाम सुनते ही रंगा जल्दी से घर से बाहर निकला और एक स्वामी के घर के बाहर पहुंचकर स्वामी जी से बोला “स्वामी

स्वामी “क्या बात है?”

रंगा “नारियल तुड़वाने है”

जवाब ना मिलने पर

रंगा “आपके पेड़ पर लगे कीड़ों को भी साफ़ कर दुँगा, अच्छा काम कर के दूंगा।“

स्वामी “पागल हो गया है क्या, तुझे इस पेड़ पर कहीं नारियल नजर आ रहें हैं क्या?”

रंगा पेड़ की और देखते हुए

स्वामी “बड़ा आया नारियल तोड़ने वाला”

रंगा “हूअ”

रंगा “अच्छा ठीक है, मैं आपका आँगन साफ़ कर दूं।“

स्वामी “जा-जा, मुझे तुझसे कोई काम नहीं करवाना है, चल भाग।“

रंगा वहां से चला गया और दुसरे, तीसरे घर पर पहुँचा पर किसी ने उसे नारियल तोड़ने का काम क्या, कोई भी काम नहीं दिया क्योंकि सभी जानते थें कि यह आलसी क्या काम करेगा?

रोचक कहानी चार रुपये Rochak Kahani Char Rupe in Hindi




दूसरी ओर गावं के चोपाल के पास एक आदमी कुली को खोज रहा था जो कुँए के अन्दर उतरकर काम कर सकें और कईयों से पूछने का बाद भी कोई भी कुँए मे उतरने के काम के लिए राजी नहीं हुआ

चाय की दूकान में एक तरफ रंगा भी बैठा हुआ था और कुछ और लोग भी

व्यक्ति यानि किसी घर का नौकर वहां पहुँचा और बोला “भाई क्या तुम कुँए को साफ़ करने वाले किसी व्यक्ति को जानते हो?”

अखबार पड़ने वाला क्यक्ति “कुँए को साफ़ करने वाले को !”

इधर-उधर देखने के बाद रंगा की ओर इशारा करते हुए “वो देखो, वो बैठा है, वो तुम्हारा काम कर देगा।“

वह व्यक्ति रंगा के पास गया और बोला “मैं एक कुँए को साफ़ करने वाले को ढूढ़ रहा हूँ।“

रामू और नौकर की बातचीत
रामू और नौकर की बातचीत

रंगा “हूँ।“

नौकर “मेरे मालिक के पितल का घड़ा कुँए में गिर गया है, तुम किसी को जानते हो जो यह काम कर सके और कुँए में उतरकर उसे निकाल सकें।“

रंगा “हूँअ, कितने पैसे देंगें वो?”

नौकर “तुम कितने लोगे?”

रंगा “पहले कुआ देखुंगा, दो रुपए से कम नहीं होगा।“

दो रुपए उस दौर में एक दिन की मजदूरी करने के बहुत ज्यादा होते थें और रामू ने मजाक-मज़ाक में दो रुपए कह दिया   

नौकर “हाँ चलेगा, चलो मेरे साथ।“  

रंगा अचानक व्यक्ति के हाँ कहने पर कुछ सोचने के बाद “अभी मुझे कुछ और काम है, कल मिलुंगा।“

तभी नौकर को अपनी मालकिन के दिये हुए काम की याद आई जो उसकी मालकिन ने उसे बोला था कि   

“मुझे पता था, तुमसे कोई काम नहीं होगा, तुम्हे तो बस खाने की पड़ी रहती है, वो घड़ा मेरी सास का था किसने कहा था, तुम्हे हाथ लगाने के लिए और जाओ किसी को लेकर आओ और ये घड़ा निकालो, नहीं तो यह तुम्हारा आखिरी दिन होगा और मैं पुलिस को भी बता दूंगी की तुम्ही ने वह घड़ा चोरी किया है, समझें।”

तभी नौकर ने रंगा को कहा “नहीं-नहीं अभी चलो और उसे अपने साथ लेकर चलने लगा

रंगा “मैं कुए के बारे में बिल्कुल नहीं जानता।“

नौकर “ऐसा मत बोलो पहले चलकर देख तो लो, मेरे मालिक ने मुझे चार दिन से परेशान कर रखा है, अगर आज भी तुम नहीं चले तो मुझे नौकरी से निकाल देंगें।“

रंगा “लेकिन मैं कुँए की बारे में कुछ नहीं जानता, ना।“

नौकर “चुप, मेरे साथ यह सब नहीं चलेगा और यदि एक या दो आने ज्यादा चाहिये तो ले लो, पर यह सब नाटक नहीं।“

रंगा “पर-पर–पर” 


और नौकर उसे लेकर मालकिन के पास पहुंचा, घर पर पहुचने के बाद

नौकर “मालिक, मालिक”

मालिक “कोई मिला क्या?”

नौकर “यह रहा”

मालिक “क्या नाम है तुम्हारा”

“जी रंगा ”

मालिक “अच्छा-अच्छा ठीक है, चलो कुँए से घड़ा निकालो”

रंगा “मालिक म्मम्म मैं कैसे निकालू? मुझे तो कुँए से घड़ा निकालने नहीं आता।“ 

मालिक अपने नौकर की ओर “अच्छा, इसे पकड़ लाया तू, ये तो बेकार है।“

नौकर “मालिक सबकुछ मुझपर छोड़ दीजिये, ये काम करेगा।“

मालिक “ठीक है, पहले कुआ तो देख लो, वैसे घड़ा गिरे चार दिन हो गये, हमारे लिए वो घड़ा बहुत ही कीमती है।“

मालकिन “हाँ-हाँ मेरी सास ने वो घड़ा मुझे दिया था, मेरी सास ने यह घड़ा दिया था और कहा था कि इसे बहुत संभालकर रखना, क्योंकि यह खानदान की एक परंपरा है, इसलिए मैं किसी को हाथ लगाने नहीं देती।“

मालिक “मुझे भी नहीं।“

मालकिन “पता है, रामू मैं इस घड़े को रोज घिस-घिस कर धोती हूँ, मिटटी और इमली से इसलिए यह सोने की तरह चमकता है, नालायक नौकर, देखों ना, क्या किया इसने? इसकी हिम्मत कैसे हुई, इसे हाथ लगाने की?

मालिक “यह मुझे भी हाथ लगाने नहीं देती, घर के मालिक को।“रोचक कहानी चार रुपये Rochak Kahani Char Rupe in Hindi


काम ना करने का बहाना सोचते हुए

रंगा “लगता है रस्सी काफी घिस गई होगी”

मालिक “पहले देख तो लो।“

रंगा का हाथ पकड़कर मालिक कुँए के पास ले गया और बोला “अरे देखो तो सही।“

कुए की गहराई देखकर घबरा जाना
कुए की गहराई देखकर घबरा जाना

कुँए की गहराई देखकर रंगा घबरा गया और डरने लगा और बोला “लगता है कुआ बहुत गहरा है।‘

मालिक “नहीं-नहीं सिर्फ साठ फिट है।“

रंगा “क्या? हम चालीस से ज्यादा गहरे में नहीं उतरते।“

मालिक “यदि तुम्हें चार आठाने और चाहिये तो मांग लो, हम दे देंगें।“

रंगा “मैं इसके चार रुपए लुंगा, बेमतलब अपनी जान जोखिम में क्यों डालूं ?”

मालिक “क्या चार रुपए, तुम्हारा दिमाग तो ठीक है ना।“

रंगा “ठीक है, तो मैं चलता हूँ।“

मालकिन “रुको, रुको दो रुपए बाराने चलेंगें।“

मालिक “हाँ हाँ चलेगा, आखिर रामू हमारा ही तो आदमी है।“     

रंगा “नहीं-नहीं चार रुपए से एक पैसा कम नहीं लुंगा।“

मालकिन “अच्छा ठीक है, रंगा के लिए यह बिल्कुल ठीक नहीं है, हम तुम्हें तीन रुपए देंगें, खुश।“

मालिक “क्या? तीन रुपए, मेरे मेहनत की कमाई को तुम इस तरह उड़ाना चाहती हो।“

मालकिन ”उसका काम भी तो खतरे का है, इसलिए मैंने कहा।“  

रंगा मैंने कहा ना चार रुपए से कम नहीं लुंगा, मुझे और भी काम है।“  रोचक कहानी चार रुपये Rochak Kahani Char Rupe in Hindi




रंगा  तो बस किसी ना किसी तरह पीछा छुड़ाना चाहता था लेकिन मालिक और मालकिन पीछा छोड़तें ही नहीं

कुछ देर बाद मालिक “ठीक है चार रुपए ही सही, चलो काम शुरू करो।“

रंगा कुए को देखने के बाद फिर घबरा जाता है और बोलता है “ठीक है मुझे पता चल गया है कि किन-किन चीजों की ज़रुरत है, वो सब सामान लेकर मैं कल आउंगा, अभी मुझे जाना होगा।“

मालिक “क्यों? अभी से काम शुरू करो।“ 

रंगा “मालिक मुझे जोर से भूख लगी है, कल फिर आउंगा।“

मालकिन “बस इतनी-सी बात, आओ-आओ, क्या हम तुम्हे खाना भी नहीं खिला सकते? आओ रंगा, आज तुम्हे हमारे ही घर खाना होगा।“

मालिक “चलो-चलो।“

मालिक “रंगा इतना कम चावल, तुम्हे काफी नहीं होगा, और चावल और साम्भर लाओ रंगा  के लिए, जल्दी।“

रंगा ने चावल, साम्भर, अचार आदि भोजन पेट भर कर किया और आखिरी में पान सुपारी भी खाई

मालिक उसके काम करने के इन्तजार में बैठा हुआ था

मालिक “अब तो भोजन हो गया रंगा।“

रंगा “हाँ पेट-भर के।‘

मालिक “चलो”

रंगा “अब मैं आराम करुगा।“

मालिक “और काम।“

रंगा “काम भी करूँगा लेकिन पहले आराम कर लूं।“ 

और इस तरह रंगा सो जाता है और मालिक अपना सिर पकड़कर बैठ जाता है कि लो अब यह खा पीकर बिना काम किये सो गया और रंगा सपने में खो जाता है कि वह चार रुपए में बहुत चीजें लेगा और अपने लिए पेंट शर्ट भी सिल्वायेगा और घर पर सारे खाने का सामान रखेगा कि तभी

मालिक “रंगा रंगा खड़े हो जाओ, कितनी नींद लोगे, सूरज ढलने वाला है, तुम्हे काम करना है।“ 

रंगा “मुझे नहीं मालूम, मैं नहीं करूंगा।“

मालिक “तुम्हे करना ही होगा और मालिक उसका हाथ पकड़कर कुए के पास ले गया और रंगा बोलता रहा मुझसे नहीं होगा।“

मालिक “उतरो कुए में और यह रस्सी पकड़ों।“

रंगा “नहीं नहीं।“

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रंगा को जबरदस्ती रस्सी पकड़ाकर कुए में उतारा गया

रंगा रस्सी के सहारे कुए में उतरने लगा और बोला “भगवान् मुझे बचा लो, मुझे नहीं पता।“

नौकर “क्यों डरता है, उतर और नीचें, छोटी सी तो बात है।“        

रंगा “मालिक, मालकिन, भगवान् मुझे बचा लो।“

मालिक “कुछ नहीं होता डरो मत, डरो मत हा हा हा”

रंगा “मुझे बचा लो, मुझे बचा लो।“

मालिक “कुछ नही होगा, उतरो पानी मैं”

कुए मे डरकर उतरना
कुए मे डरकर उतरना

और रंगा मुझे बचा लो, मुझे बचा लो कहता हुआ पानी में उतर गया और डरते हुए घड़े को ढूढने लगा कुछ देर तक पानी में रहने के बाद 

रंगा “मिल गया, मिल गया घड़ा मिल गया, मुझे घड़ा मिल गया।“

मालकिन “घड़ा मिल गया, मेरा घड़ा मिला गया।“

मालिक “हाँ, तुम्हारा घड़ा मिल गया।“

नौकर “हाँ मालकिन मिल गया।“

और फिर रस्सी के सहारे रंगा को मालिक और नौकर ने उप्पर की ओर खिंचा, रंगा भी बहुत खुश हुआ जो उसने डरते-डरते ये काम किया

घड़ा मिलना
घड़ा मिलना

रंगा “घड़ा मिल गया, चार रुपए मिल गया।“

मालकिन घड़ा हाथ में लेते हुए “मेरा घड़ा मिल गया, मेरा घड़ा मिल गया कहकर घड़ा लेकर घर के अन्दर चली गई।“  

मालिक “बड़े काम के आदमी हो, तुमने चार रुपए के लायक ही काम किया है, फिर कभी कुए में गिरा तो हम तुम्हें ही बुलायेंगें।“  

रंगा “अचम्बे में ह”

मालिक “यह बताओ तुम रहते कहाँ हो?”   

रंगा “मैं किधर रहता हूँ? छोड़िये मैं कुए में नहीं उतरूंगा, कभी नहीं

कुछ देर सोचने के बाद रंगा “मालिक मुझे ओर एक रुपए और देना, इतनी मुश्किल से निकाल के लाया हूँ

नौकर “तुम सब एक जैसे हो, कितना भी दो तुम्हारा पेट नहीं भरता है।“

मालिक “लालच की भी हद होती है अरे इससे कम कीमत में तो नया घड़ा मिल जाएगा, हमने तुम्हे खाना दिया पैसा दिया जाओ जाओ।“

रंगा “नहीं नहीं हम कुए में उतरकर, अपनी जान जोखिम में डालते हैं मालिक और दे दो ना।“

मालिक “अब और पैसे नहीं।“

रंगा “मालिक”

मालिक “ठीक है मैं तुम्हे अपनी एक कमीज दुंगा

रंगा “ठीक है”

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रंगा कमाकर घर की ओर लोटा

और रंगा अपने घर की ओर चल पड़ा, घर पहुँचने के बाद उसकी पत्नी बोली “अब शाम के सात बजने को है कब चावल आयेंगें और कब बनाउंगी तुम क्या समझते हो, आज रात खाना नहीं बनेगा तो खाओगे क्या?”  

रंगा “पैसे निकाल कर ये लो।“



पत्नी “आश्चर्य से देखते हुए,चार रुपय! तुमने कहीं चोरी तो नहीं की और यह कपड़े।“

रंगा “यह देख, यह देख, यह चोट है मेरे हाथ और पाँव पर, तुझे क्या मालूम मैं कितने गहरे कुए में उतरकर कमा लाया हूँ।“     

पत्नी “तुम और कुए के पास, मुझे तो लगता है तुम किसी की जेब काटकर आ रहे हो।“

रंगा “नहीं-नहीं यह पैसे मुझे जमींदार ने दिये है, उनका घड़ा मैंने कुए में उतरकर बाहर निकाला है।“

पत्नी “देखों तुम मुझसे झूट मत बोलो, क्या मैं नहीं जानती तुम पानी के डर से नहाते भी नहीं हो, इतनी बदबू आती है, छि।“

रंगा “मैं कसम खाकर कहता हूँ कि सब लोगों ने मुझे जबरदस्ती पकड़कर कुए में उतारा है, मैंने उनसे चार रुपये के अलावा और मांगें तो उन्होंने चार रुपये चार आने के साथ यह कमीज भी दी।“

पत्नी “ये भी अच्छा ही है, अब हमारा गुजारा कई दिनों तक हो जाएगा मैं चाहती हूँ कि अब तुम पेड़ में चड़ने का काम छोड़कर, कुए साफ़ करने का काम शुरू कर दो।“

रंगा “मुझे जल्दी मरवाना चाहती है क्या? तुझे पैसे से मतलब है ना, अब मुझे यह मत समझा  कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं।“



पत्नी “देखो अब बहुत हो गया, सच-सच बताओ वरना पुलिस को बुलाऊंगी।“

की तभी एक घड़ा जो उसकी पत्नी की माँ ने दिया था, उसे अपनी पत्नी के हाथ में देखकर उसे मालकिन के घड़े की याद आ गई और बोला “यह घड़ा कैसे आ गया यहाँ।“

पत्नी “ये मेरी माँ ने मुझे दिया है।“                 

रंगा “इसे यहाँ से दूर करों।“

पत्नी “आखिर क्यों।“

रंगा “इसे बाहर फेंकों नहीं तो मैं घर से चला जाउंगा और रामू वहां से उठ गया।“

पत्नी “हा हा हा हा हा हा”

घर पर भी घड़े का मिलना
घर पर भी घड़े का मिलना

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आपका शुभचिंतक

प्रकाश चाँद जोशी

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