Best Stories In Hindi पंचतंत्र कहानी भोले भाले फंस जाते हैं

शेर और गीदड़ दोनों में बहुत गहरी दोस्ती चली आ रही थी। वैसे तो गीदड़ जैसा चालाक और होशियार जैसा कोई जानवर नहीं, क्योंकि वह सदा अपनी चालाकी और हेराफेरी से अपना पेट पालता है। यह कभी भी भूखा नहीं रहता, चाहे इसके लिए किसी को भी धोखा, क्यों ना देना पड़ जाये।Best Stories In Hindi पंचतंत्र कहानी भोले भाले फंस जाते हैं

आगे की कहानी

एक जंगल में ऐसा ही एक गीदड़ रहता था जो जंगल के राजा, शेर का मंत्री बना हुआ था और इस कारण उससे वन के सभी जानवर डरते थे।

छोटे-मोटे को तो वह बहुत ही आसानी से अपना भोजन बना लेता था।   

शेर और जंगली हाथी का युद्ध होना

एक बार जंगली हाथी और शेर में युद्ध हुआ तो इसमें शेर बुरी तरह घायल हो गया। इस युद्ध का यह परिणाम हुआ कि वह अपनी घायल अवस्था में अपनी गुफा से निकल ही नहीं पाया।

और तो और अब उसके पास शिकार करने की भी हिम्मत नहीं थी।

यह सब सोचकर गीदड़, जो उसका मंत्री था, वो सोचने लगा कि अब तो भूखे मरने की नौबत आ जायेगी, अब मेरा क्या होगा?

अंत में बहुत दुखी होकर वह शेर के पास गया और बोला “महाराज, अब हमारा क्या होगा, हम तो अब भूखे मर जायेंगें।“

गीदड़ की बात सुनकर शेर भी सोच में पड़ गया कि मेरे घायल होने से हमें भूखा ही मरना पड़ेगा, परन्तु अब करें भी तो क्या?”

बार-बार, सोचने के बाद शेर की हालात भूख से बहुत बुरी हो गई थी और सोचते-सोचते तो हालात और ज्यादा खराब हो गई।

भूख मिटाने के लिए तो प्राणी कुछ भी करने को तैयार रहता है और थोड़ी देर बाद शेर ने गीदड़ से कहा “देखो मंत्री, महोदय, तुम बहुत ही होशियार और चालाक हो, अब तुम जंगल में जाकर किसी भी भोले-भाले जानवर को बातों में बहला-फुसलाकर ले आओं।

मैं उस जानवर की यहीं मारूंगा और फिर हम दोनों पेट भरकर भोजन करेंगें। मैं जानता हूँ कि शेर के लिए इस प्रकार धोखे से भोजन करना सही नहीं है, लेकिन भूख से मरने से तो अच्छा है।

हाँ…..हाँ…….महाराज आपने बिल्कुल ठीक कहा, मैं जंगल में जाता हूँ और किसी भोले-भाले जानवर को लेकर आता हूँ, आप उसे मारकर भोजन कर लेना और बाकी बचा हुआ, मैं कर लुंगा।

शेर “ठीक है, मंत्री जी, आप अति शीघ्र जाएँ”। गीदड़ को भेजने के बाद शेर अपनी गुफा में चला गया।

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गीदड़ का अपने शिकार के लिए घूमना

गीदड़ किसी भोले-भाले शिकार की खोज में जंगल में घुमने लगा और काफी देर बाद उसे एक मक्के के खेत में गधा नजर आया, जो मक्का खा रहा था।

गधे को देखकर गीदड़ को एक नाटक सुझा, उसे पता था कि गधा, बेचारा बहुत भोला-भाला जानवर है।

इसपर, इसका मालिक कितना भी बोझा डालता है तो यह बिना शिकायत के और बिना भोजन के बोझा ढोता रहता है और बूढा होने के बाद इसका मालिक इसे घर से निकाल देता है। क्यों ना! इसे फसाया जाये।

गीदड़ द्वारा गधे से बड़ी विन्रमता से बात करना

गीदड़ बड़े प्यार से गधे के पास गया और बोला “राम-राम, बड़े भाई।”

“राम-राम, भैय्या और इधर कैसे आना हुआ।“

अरे, बड़े भाई क्या बताऊँ……..जंगल में अकेला ही हूँ, अपना ना तो कोई साथी है और ना ही कोई दोस्त। अकेले पड़े-पड़े जब दिल उदास हो जाता है तो यूहीं घुमने चल देता हूँ।

इस आशा में कि कोई दोस्त मुझ अभागे को मिल जाये।

गधे ने पूछा “क्या तुम भी अकेले ही रहते हो।“

हाँ भैय्या, अकेला ही रहता हूँ और एक सच्चे दोस्त की तलाश कर रहा हूँ। क्या तुम मेरे मित्र बनोगे?”

गीदड़ ने पास जाकर गधे को कहा “यदि तुम जैसा होनहार और सीधा-सादा मेरा मित्र बन जाये तो मैं अपने आपको बहुत भाग्यशाली समझूंगा।“

गधा खुश होकर बोला “यदि तुम्हारी प्रसन्नता इसी में है तो मैं आज से तुम्हारा पक्का दोस्त हुआ।“ उसे क्या पता था कि गीदड़, उसे अपने जाल में फसा रहा है, उसने चालाकी और हेराफेरी का एक जाल उसके लिए बुन रखा है और इस जाल में वह ख़ुशी-ख़ुशी फंस रहा था।

उसका फंसने का एक मुख्य कारण यह भी था कि वह अकेला था, जिस मालिक  के पास वो काम करता, वह उसपर बोझ लादकर पुरे दिन काम करवाता और खाने-पीने को उसे कुछ ना देता।

उसका मालिक उसे छोड़ देता ताकि वह, अपने आप किसी खेत में जाकर पेट भर ले। यही दुःख था उसके मन में जिसे वह किसी से कह भी नहीं सकता था।

आज उसे जीवन में पहला मित्र मिला था, जिसने आगे से दोस्ती का हाथ बड़ाया था। वह गीदड़ का दोस्त बना तो उसने उसे खाने की दावत दे दी।

जिसे उसने ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार कर लिया, उसके मन में तो बस एक बात थी कि किसी ना किसी तरह उसका, इसके मालिक से पीछा छुट जाये।

यहीं कारण था कि वह गीदड़ के साथ जंगल की ओर चल पड़ा। गीदड़ अपनी जगह खुश था कि उसने शिकार फांस लिया और दूसरी ओर गधा कि उसे एक दोस्त मिल गया।


गीदड़ के साथ गधे का शेर के पास जाना

चलते-चलते दोनों उस गुफा के पास पहुँच गये, जिसमे शेर पहले से ही शिकार पर झपटने के लिए तैयार बैठा था।

उसने दूर से ही गधे और गीदड़ को आते देख लिया था, वह समझ गया था गधा ही उसका शिकार बनेगा….मोटा-ताजा गधा…..देखकर उसकी भूख बड़ने लगी।

शेर को देखकर गधे का भाग खड़े होना

जैसे ही गधा गुफा के पास आया तो शेर एकदम से बाहर निकल आया ताकि गधे का शिकार कर लूं, लेकिन गधा भी कम होशियार नहीं था जैसे ही उसने गधे को अपनी ओर आते देखा तो तुरंत पीछे मुड़कर भाग खडा हुआ।

गधा भाग गया तो शेर और गीदड़ को बहुत दुःख हुआ। हाथ में आया शिकार निकल गया, तो गीदड़ ने शेर से कहा “महाराज! आपने ये क्या किया, जो हाथ से आया शिकार निकाल दिया।“

शेर “असल में मैं पूरी तरह तैयार नहीं था, जख्मी होने के कारण तेजी से भाग नहीं सका, अब किसी भी तरह उसे दोबारा ले आओं,

मैं गुफा के अन्दर छुप कर बैठुंगा और जैसे ही वह आयेगा मैं निकल कर उसको दबोच लूंगा। इस बार बड़ी होशियारी से काम लूंगा।

गीदड़ का गधे के पास जाना

दुसरे दिन जैसे ही गीदड़ गधे के पास गया तो गधा मुहं फेरकर एक ओर हो गया।

गीदड़ “बड़े भइय्या लगता है, तुम, मुझसे नाराज हो गये हो।“

“अरे काहे का भाई, किसका भाई, तुम तो अच्छे भाई हो, यदि मैं कल जान बचाकर नहीं भागता तो मेरा तो काम हो जाना था। अब तुम जाओं भैय्या मेरे लिए तो मेरा मालिक का घर ही अच्छा है।“

गीदड़ “भैय्या तुम भी कितने भोले-भाले हो, क्या तुम्हें वह शेर नजर आया था ? अरे भाई वह शेर नहीं था, बल्कि तुम्हारी होने वाली पत्नी, गधी थी।“

“यह तुम क्या कह रहे हो।“

“जो सत्य है वही कह रहा हूँ, वह तो तुम्हारे गले में शादी का हार डालने आ रही थी, मगर तुम हो कि अपनी होने वाली पत्नी से डरकर भाग खड़े हुए।

“अब कहाँ है वह गधी?”

उसी गुफा में बैठी हुई रो रही है।“

“क्यों रो रही है।“

“तुम्हारे लिए रो रही है, कहती है कि तुम मेरे लिए इतना सुंदर पति ढूंढकर लाये, मगर वह बेवफा भाग गया।“

“मैंने उसे वचन दिया है कि कुछ भी हो जाये, अब तुम्हारे पति को मनाकर लाऊंगा, वह मेरा भाई है, मुझे कभी इनकार नहीं करेगा, अब चलो, नहीं तो बेचारी रो-रोकर मर जायेगी।

नहीं-नहीं ऐसा मत कहो, भैय्या. मैं चलूँगा और उससे ही विवाह करूँगा जो मेरी याद में बैठी रो रही है।




एक बार फिर गीदड़ गधे को बेवकूफ बनाकर ले गया

भोला-भाला गधा फिर से एक बार गीदड़ के जाल में फंस गया और शादी के लालच में कल वाली घटना को भूल गया। उसे कल वाला शेर गधी नजर आने लगी थी।

गीदड़ अपनी सफलता में बहुत खुश था और मन ही मन गधे के स्वादिष्ट भोजन के बारे में सोचने लगा और दूसरी और गधा अपनी होने वाली पत्नी के सपने लेने लगा और तेजी से गुफा की ओर चलने लगा।

जैसे ही गधा गुफा के निकट पहुंचा। शेर ने उसे दबोच लिया और देखते ही देखते गधा धरती पर आ गिरा। उसका सारा शरीर लहुलुहान हो गया।

फिर शेर और गीदड़ दोनों उसका मांस खाने लगे।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी राह चलते आदमी की मीठी-मीठी बातों पर विश्वास न करों, अपनी जात-बिरादरी से बाहर न जाओं, पहले इंसान को समझो फिर उसके साथ दोस्ती और रिश्ते बनाओं।

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आप सबका शुभचिंतक

P C JOSHI

hamaarijeet.com

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