BHAGVAAN SHIV KI TAPSTHALI SHRI JAAGESHVAR DHAM KI YATRA

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BHAGVAAN SHIV KI TAPSTHALI SHRI JAAGESHVAR DHAM KI YATRA
भगवान शिव की तपस्थली श्री जागेश्वर धाम की यात्रा

BHAGVAAN SHIV KI TAPSTHALI SHRI JAAGESHVAR DHAM KI YATRA

जब आप अपने देनिक जीवन के कार्यो से थक जाएँ या घोर निराशा मे रहने लगें तो आपको शांत वातावरण और आध्यात्मिक जगह की आवश्यकता होगी और श्री जागेश्वर धाम की यात्रा आपके लिए लाभदायक होगी जोकि आध्यात्मिक तौर पर आपके स्वास्थ्य और उन्नति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए आप जीवन में एक बार यहाँ दर्शन के लिए ज़रूर जाएँ।BHAGVAAN SHIV KI TAPSTHALI SHRI JAAGESHVAR DHAM KI YATRA

जागेश्वर धाम की यात्रा शुरू करने से पहले आपको इसके बारे में जानना बहुत आवश्‍यक है।

पुराणो के अनुसार बारह ज्योतिलिगों मे से नागेश दारुका बने शब्द मे इसी स्थान के बारे में बताया गया है। क्योंकि देवदारू (देवदार) वृक्ष का जंगल यही है। यहाँ शंकर भगवान परम पवित्र दो गंगाओं के बीच में विराजमान है। पहला जागेश्वर से दो किलोमीटर दूर पहाड़ों से निकलती हुई परम पवित्र जटा गंगा और ब्रह्मकुंड में सरयू गंगा का परम संगम स्थान है।

इस स्थान का वर्णन स्वयम् भगवान विष्णु ने पुराणो मे किया है। जागेश्वर क्षेत्र में भगवान शिव के प्रकट होने की कथा बड़ी रहस्यभरी है। यही से उन्होने कैलाशख़ंड, केदारखंड, पातालखंड, नागखंड सहित अनेकों रूपों में अपनी लीलाओं को विस्तार किया। जागेश्वर मंदिर समूह में लगभग 124 छोटे-बड़े प्राचीन मंदिर है।        

JAAGESHVAR TEMPLE
JAAGESHVAR TEMPLE BY HAMAARI JEET.COM

हिमालय पर्वत साक्षात शिव का परम दिव्य स्थान है। जहाँ शिव हमेशा विचरण करते हैं, इसी हिमालय की गोद में श्री जागेश्वर धाम विराजमान है जो प्राचीन एवं सुंदर है।

श्री जागेश्वर धाम में प्राचीन महामृत्युन्जय मंदिर है और भारत वर्ष में स्थित सभी शिवलिंगों का उदगम स्थल है व सबसे पहले शिवलिंग रूप में पूजा की शुरुआत यही से हुई है। यह स्थान आदि काल से पूज्‍यनीय रहा है। पृथ्वी के संकट को दूर करने के लिए सर्वप्रथम शिव यही प्रकट और अवतरित हुए थे।

विशेष रूप से यहाँ मृत्युन्जय जाप कराया जाता है। जाप संख्या 108, 1100, 11000, 23000, 54000, 125000

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श्री जागेश्वर धाम की यात्रा शुरू करने से पहले आपको निम्न वस्तुएँ अपने साथ ले जाना आवश्यक है, जो निम्न है

मौसम अनुसार कपड़ें।

जुराब, रुमाल, तोलिये।

यदि आपकी दवाई चल रही है तो प्लास्टिक बॉक्स में ले जाये, छोटा बच्चा साथ हो तो डॉक्टर की सलाह से दवाई ले लें।

कम से कम दो छाते जरुर ले जाएं।

सही मोबाइल कैमरा अपने साथ लें जाए ताकि फोटो खिचने में परेशानी ना हो

दो मोबाइल चार्जर और हो सकें तो बैटरी बैकअप भी साथ लें, जाए।

अपना आधार कार्ड या पेन कार्ड लें जाएं।

मेडिकल इन्सुरेंस हो तो सभी का मेडिकल कार्ड व पहचान पत्र या आधार कार्ड आदि होना ज़रूरी है।

हवाई चप्पल अपने साथ ले जाएं ।

पानी की बोतल ।

सर्दी में जाने पर गर्म कपड़े और जूतें।

हाथ धोने के लिए साबुन ।

हल्के वजन वाले बैग।

कुछ वाटर प्रूफ पॉलीबैग।

आयल, tooth paste और ब्रश।

News papers।

पेट साफ करने के लिए Dizen आदि की गोली जो भी आपको suit करें ।


काठगोदाम से श्री जागेश्वर धाम की यात्रा की शुरुआत करें

यदि आप जागेश्वर धाम की यात्रा का प्लान बना रहें है तो आपको रेल के माध्यम से काठगोदाम स्टेशन तक का टिकट बुक करवाना होगा, इसके लिए आप रेल टिकट या बस के द्वारा भी काठगोदाम पहुच सकते हैं।

रात्रि के समय काठगोदाम से आगे की पहाड़ी यात्रा करना मना है, इसलिए  आप हो सके तो सुबह काठगोदाम पहुचें और यदि रात में पहुँचते है तो होटल बुक कर लें।

यदि आप बस से आ रहें है तो आपको हल्दवानी बस टर्मिनल पहुँचना होगा और उसके बाद हल्दवानी से सीधे जागेश्वर की बस लेनी होगी जो आपको आर्टोल उतारेगी और उसके बाद आपको प्राइवेट गाड़ी के द्वारा जागेश्वर मंदिर पहुँचना होगा, जिसमें एक व्यक्ति का किराया दस से बीस रुपए के बीच होगा।

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विस्तार से

काठगोदाम से पहाड़ी यात्रा शुरू हो जाएगी, पहाड़ की यात्रा शुरू होने पर आपको एसा लगेगा कि हम एक अलग ही दुनिया में आ गये। आपको हवा में पहाड़ो के वृक्षों की सुंदर महक का अहसास होगा और वहाँ का पानी पीने पर आपके पेट के रोग ख़त्म होने लगेंगें और हो सके तो वहाँ के लोगों से पूछे क़ी कुदरती पानी कहाँ मिलेगा, जिसे नोला का पानी भी कहते हैं। 

रास्ते मे आपको भीमताल पड़ेगा जिसे भीम ने अपनी गदा मारकर तोड़ा था। 

काठगोदाम से पहले आप भवाली पहुचेंगे, भवाली में आपको पहाड़ी फल बेचतें हुए मिलेंगें जिसे आप खरीद लें जेसे खुमानी,  आडू भूखारा, काफल आदि पर यह मौसम के  अनुसार ही मिलते है, विशेषकर मई और जून के महीने में।     

भवाली के बाद केंचिधाम और केचिधाम से खेरना का सफ़र होगा। केंचिधाम में नीम कारोली बाबा का आश्रम मिलेगा जहाँ पर Apple  व facebook कंपनी के फाउंडर भी आशीर्वाद लेने जब आएँ थे, जब वो परेशानी में थे।

खेरना से काकडिघाट, काकडिघाट से अल्मोड़ा, अल्मोड़ा से आप वहाँ की फेमस बाल मिठाई का आनद ज़रूर लें और यहाँ पर आप भोजन कर सकतें है, लेकिन यहाँ के नागरिक से पूछ ले कि हमें सस्ता और स्थानीय भोजन करना है, उसके बारे में बताएँ।

अब आप भोजन करने के बाद अल्मोड़ा से पिथोरागड़ मार्ग पर चित्तई, गोलू देवता का मंदिर है उसका दर्शन अवश्य करें। इसके बाद चित्तई, गोलू देवता के मंदिर से बरेच्छिना, बरेच्छिना से पनूनोला और पनुनोला से आर्तोला और आर्तोला से तीन किलोमीटर की दूरी पर जागेश्वर धाम पहुचेंगें। इस धाम की उचाई समुद्र तल से 1870 मीटर हैं।

यदि आप हवाई यात्रा से आना चाहते है तो पंतनगर एरपोर्ट तक पहुचें और उसके बाद गाड़ी बुक कराकर सीधे अल्मोड़ा जागेश्वर पहुँच सकते हैं।


आप जागेश्वर धाम आने से पहले होटेल की टिकट अवश्य बुक कर लें, इसके लिए आप उत्तराखंड सरकार की वेब साइट से रूम बुक कर सकतें हैं, वेब साइट लिंक http://www.kmvn.gov.in/details/index/62

आप तारा गेस्ट हाउस में भी होटेल बुक कर सकतें है जो आपके लिए सस्ता होगा, इसमे आपको एक कमरे का किराया 800 से 1500 के बीच होगा, खाना अलग से।

आपके पास नकद पैसा होना ज़रूरी है, नही तो आपको नकद राशि की परेशानी हो जाएगी।

मंदिर में आप शाम की आरती जो 7 बजे शुरू होती है, उसमें शामिल ज़रूर होये। इसके बाद एक रात आराम कर आप अगले दिन नहा-धोकर बिना भोजन करें, सबसे पहले मंदिर के दर्शन करें, मंदिर परिसर में चप्पल व जूते उतारकर जाएँ और प्रसाद ज़रूर लें जाएँ, जब आप मंदिर में पहुचेंगें तो आपको एसा लगेगा कि आप भगवान शिव के पास पहुँच गये हो।

आपको मंदिर परिसर में पुजारी मिलेंगें जो पूरे विधि विधान से मृत्युन्जय जाप कराएँगें जैसे जाप 108, 1100. 11000, 23000, 54000, 12000  आदि

मंदिर परिसर में प्राचीन कालीन अश्वमेघ हवनकुंड भी हैं।इसके बाद आप कुबेर के मंदिर के दर्शन, ब्रह्मकुंड के दर्शन 

BRAHM KUND
BRAHM KUND BY HAMAARIJEET.COM

और वृद्ध  जागेश्वर जोकि भगवान शिव की वृद्ध अवस्था का रूप है दर्शन ज़रूर करें

यदि आप और यात्रा करना चाहते है तो पाताल भुवनेश्वर के दर्शन और सरयू नदी के दर्शन भी करें जोकि जागेश्वर धाम से 105 और 47 किलोमीटर दूर है।     

यात्रा शुरू करने से पहले कुछ बातों का ध्यान ज़रूर  रखें जेसे

फूल आदि ना तोड़े

बेंक का ATM  ना होने की वजह से नकद राशि  ले जाना ना भूलें

कुछ जानकारी लेनी हो तो वहाँ के नागरिक से या उत्तराखंड टूरिसम से संपर्क करें

फोन शीम के बारे में पता करें की कौन सा शीम चलता है या नही

उतराखंड देव भूमि है उसे गंदा ना करें

प्लास्टिक पिंनी का प्रयोग करना माना है

गाड़ी का हॉर्न तेज ना बजाएँ, हो सके तो हॉर्न का प्रयोग ना करें

कुशल ड्राइवर को अपने साथ रखें

दारू आदि का सेवन बिल्कुल ना करें

पहले से ही होटेल बुक करना ना भूलें

सफ़र में फल और फ्रूट आदि ले जाना ना भूलें

भारी वजन वालें बेग की जगह हलकें बेग रखें    


सावन और शिव रात्रि के महीने में यहाँ पर मेला लगता है और ऐसा माना जाता है की इस दिन आप भगवान शिव से जो भी मांगोगे वो अवश्य मिलेगा। 

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प्रिय पाठकों,

मैं आशा करता हूँ कि आपको श्री जागेश्वर धाम की यात्रा के बारे में दी गई जानकारी सही लगी होगी और आप भी इस पावन और पवित्र स्थान की यात्रा ज़रूर करना चाहेंगें। 

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आपका शुभचिंतक

प्रकाश चाँद जोशी

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6 COMMENTS

  1. आदरणीय जोशी जी,
    सर्वप्रथम मेरा प्रणाम स्वीकार करें तदाउपरान्त मैं एक जिज्ञासा के सन्दर्भ में आपसे एक महत्वपूर्ण सूचना चाहता हूँ कि यहाँ कोई व्यक्ति स्वयं प्रतिदिन भगवान शिव की आराधना कर सकता है क्या एक गरीब यहाँ आ सकता है

    • अरुण जी सर्वप्रथम धन्यवाद आपको कि आपने मेरा ब्लॉग पड़ा, मैं आपको बताना चाहता हूँ कि यहाँ पर कोई भी व्यक्ति जा सकता है और पूजा अर्चना भी कर सकता है, चाहे वह किसी भी जाति का हो, गरीब हो या अमीर, हाँ यह ध्यान रखना यहाँ पर आप शाम तक पहुचोगे और आपको कमरा लेना होगा जिसका किराया 800 से 1200 रुपए और भोजन का अलग होगा और कम से कम दो रात रुकें, यहाँ पहुचने पर ऐसा लगेगा कि जैसे आप ने साक्षात शिव जी के दर्शन कर लिए यहाँ से आगे और कही भी जाना हो तो सरयू नदी 80 किलोमीटर और पातळ भुवनेश्वर 100 किलोमीटर के लगभग है मंदिर से

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