Budh Purnima ya Budh Jayanti ka Shubh Din in Hindi

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बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती का शुभ-दिन:

भगवान बुद्ध जी का जन्म लुम्बिनी, भारत (आज के नेपाल ) में लगभग 2580 वर्ष पूर्व हुआ था. हमारे लिए बड़े सोभाग्य की बात है, उसी दिन उनका जन्म, ज्ञान की प्राप्ति (बुद्धत्व) और महापरिनिर्वाण (मुक्ति) भी मिली थी, अतार्थ ये तीनों एक ही दिन वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे. Budh Purnima ya Budh Jayanti ka Shubh Din in Hindi  

वैशाख (हिन्दू धर्म के अनुसार वर्ष में सबसे पवित्र माह जिस दिन कई शुभ कार्य किये जातें हैं) पूर्णिमा (इस दिन चंद्रमा आकाश में पूरा दिखता है) के दिन ही हुए थे.

विश्व में लगभग 170 करोड़ लोग बुद्ध जयंती को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान् बुद्ध जी विष्णु के नोवें अवतार हैं. इसी दिन गंगा स्नान भी किया जाता है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है.

इस दिन आप प्रातः स्नान कर पुरे दिन व्रत रखें और रात के समय चंद्रमा की पूजा कर उन्हें जल दें और गरीब लोगो और ब्राह्मण को दान दें.         

इस पोस्ट में दी गई जानकारी धार्मिक आस्थाओं पर आधारित है. 

बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध के उपदेश सुनते है और उन्हें अपने जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं.

बिहार में बोधगया नाम का एक स्थान है जो हिन्दू और बोद्ध धर्म मानने वालों का पवित्र स्थान है, जहाँ बुद्ध जी ने सत्य की खोज के लिए सात वर्षों तक कठोर तप किया और ज्ञान की प्राप्ति की. तभी से इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के तौर पर मनाया जाता है.  

इसी दिन कई देशों से बोद्ध धर्म के मानने वालें भारत में बोधगया आतें हैं और पूजा अर्चना करते हैं और बोधि वृक्ष जो एक पीपल का प्राचीन वृक्ष हैं, उसकी पूजा की जाती हैं, क्योंकिं बुद्ध जी ने इसी वृक्ष के निचे बैठकर लगभग 2549 वर्ष पूर्व ज्ञान अर्जित किया था.

Budh Purnima ya Budh Jayanti ka Shubh Din in Hindi  

भगवान बुद्ध जी के द्वारा कुछ दियें गएँ महत्वपूर्ण उपदेश जो हमारे जीवन के लिए काफी उपयोगी हैं:-

“इच्छाओं का कभी अंत नहीं होता, अगर आपकी एक इच्छा पूरी होती है, तो दूसरी तुरन जन्म लेती है”

“तीन चीजें ज्यादा देर तक नहीं छुपी रह सकती हैं, सूर्य, चन्द्रमा और सत्य”  

ईर्ष्या और नफरत की आग में जलने वाला मनुष्य चाहें जितना जतन करलें, वह कभी सच्ची खुशी और हंसी प्राप्त नहीं कर सकता है”

“जिस ने अपने को वश में कर लिया उसकी जीत को देवता भी हार में नहीं बदल सकतें”

“हजारों खोख़लें शब्द्धो से अच्छा वह एक शब्द जो शांति लायें”    

किसी ने बुद्ध जी से पूछा “आप बड़े है नीचें क्यों बैठते हैं”, बड़ा खुबसूरत जवाब दिया “नीचें बैठने वाला मनुष्य कभी गिरता नहीं”         

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर महापरिनिर्वाणस्थली, कुशीनगर जो गोरखपुर से 50 किलोमीटर दूर है, जहाँ बुद्ध जी के अंतिम दर्शन हुए थे, वहां पर प्रत्येक बर्ष एक माह तक मेला लगता है जिसमे सभी लोग आतें हैं.

बुद्ध पूर्णिमा के दिन, आज से लगभग 2501 वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध जी, अपनी आत्मा को त्यागकर ब्रह्माण्ड में लुप्त हो गयें, लेकिन उनके दियें गएँ उपद्देश आज भी हमारे लिए प्रेरणादायक है जो हमें हमेशा सकरात्मक सोच के साथ जीवन को सुखमय बनाने में सहयोग करते रहेंगें.

मेरी और से यह एक छोटा सा प्रयास है और आप भी इस post को आगे share करें ताकि सब लोगों को बुद्ध जी के बारें में पता चल सकें.  

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आपका शुभचिंतक

प्रकाश चाँद जोशी

Hamaarijeet.com 

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