Chandra Shekhar Azad Mahaan Krantikari true story in Hindi

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Chandra Shekhar Azad Mahaan Krantikari true story in Hindi
KRANTIKARI CHANDRASHEKHAR AZAD

Chandra Shekhar Azad Mahaan Krantikari true story in Hindi

मेरा सोभाग्य है कि मैं आपके सामने स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी व लेखक, मन्मथनाथ गुप्त द्वारा रचित रचना में से, हमारे देश के लिए शहीद हुए महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद जी की सच्ची घटना के बारे में बता रहा हूँ, जो आपके लियें जानना अत्यन्त आवश्यक है की किस प्रकार हमारे देश की आज़ादी के लिए इन्होने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया वो भी बिना किसी भय के…..Chandra Shekhar Azad Mahaan Krantikari true story in Hindi

 

MNMANATH GUPT FREEDOM FIGHTER
FREEDOM FIGHTER

स्वतंत्रता के महान क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद

CHANDRASHEKHAR AZAD
FREEDOM FIGHTER CHANDRASHEKHAR AZAD AND HIS MOTHER

कानपूर, उन्नाव के बदरका गाँव में माता जगरानी देवी जी ने, दिनाक 7 जनवरी 1906 को पिता पंडित सीताराम तिवारी जी के घर में, सिंह शावक (Son of Lion) चन्द्रशेखर जैसे स्वतंत्रता के महान क्रांतिकारी का जन्म हुआ, उनकी माँ ने अपने वीर पुत्र में उन अच्छाईयों को भरा था, जिसके कारण वो निडर, साहसी और अंग्रेजों के अन्दर कपकपीं पैदा करने वाला देश का सच्चा सपूत बना I

चन्द्रशेखर जी का नाम आज़ाद होने के पीछे की एक साहसी घटना

वाराणसी में सन 1921 में असहयोग आन्दोलन के समय, जब आज़ाद जी कक्षा 4th में थें तब, उन्हें अंग्रेंजों के विरुद्ध नारें लगाने और पत्थर मारने के जुर्म में जज के सामने ले जाया गया तो जज ने उनसे पुछा….

“तुम्हारा नाम क्या है”

बालक चंद्रशेखर ने बिना डरे कहा “आज़ाद”

“पिता का नाम?”

आज़ाद ने तन कर कहा “स्वाधीन”

“तुम्हारा घर कहाँ हैं?”

आज़ाद ने गरजना के साथ कहा “जेलखाना”

और फिर आगे कहा

“दुश्मनों की गोलियों का हम सामना करेंगें

आज़ाद ही रहें हें आज़ाद ही रहेंगें”  

जज ने बालक चंद्रशेखर को पंद्रह बैंतों की सजा सुनाइ, उनके शरीर पर बैत लग रहें थें और मुहं से बार बार निकल रहा था “भारत माता की जय, भारत माता की जय”

काशी में उसी दिन वीर बालक चंद्रशेखर का स्वागत हुआ और उनका नाम यहीं से आज़ाद पड़ गया और वो चद्रशेखर से चंद्रशेखर आज़ाद हो गये I

Chandra Shekhar Azad Mahaan Krantikari true story in Hindi


बचपन की एक और घटना

आज़ाद जी बचपन से ही बहुत जिद्दी थे, जिस काम को करना चाहते थें, उसे करके ही दम लेतें I

एक बार वो माचिस से खेल रहें थें, तब उन्होंने दोस्तों से कहाँ की “जब एक माचिस की तिल्ली से इतनी रौशनी होती है तो सब से कितनी होगी”I

सारी तिल्ली जलाने का प्रस्ताव अपने दोस्तों के सामने रखा, पर किसी की हिम्मत नहीं हुई की सारी तिल्लियों को जलाएं तभी आज़ाद जी आगे आयें और आज़ाद जी ने एक साथ सारी तिल्लियों को जलाया, लेकिन तिल्ली जलाते हुए उनका हाथ जल गया, लेकिन उन्होंने उफ़ तक नहीं की और मुस्कराने लगें I

क्रन्तिकारी आन्दोलन की कुछ झलकियाँ 

क्रांतिकारी कई दिनों तक भुखें रहते थें या चने खा कर व पानी पी कर अंगेजों के खिलाफ लड़तें रहतें, सब के मन में, अपने देश के लिए बस एक ही तमन्ना थी कि मेरा देश जल्द से जल्द आज़ाद हो, चाहें इसके लिए उन्हें कुछ भी क्यों न करने पड़े I

अपने संगठन में धन की कमी की पूर्ति के लियें इन्होने अंग्रेजो का खजाना जो ट्रेन में आ रहा था, लुटने का प्लान बनाया I लखनऊ में काकोरी काण्ड को लुटने में चन्द्रशेखर आज़ाद जी अपने अन्य साथियों रामप्रसाद बिस्मिल, असफाक उल्ला खान, रोशन सिंह, राजेन्द्रनाथ लाहिरी, मम्न्नाथ गुप्त, सचिन्नाथ बक्षी, मुकुंदीलाल केशव व अन्य साथियों के साथ शामिल थें और किसी देशद्रोही के कारण सब पकड़े गएँ, लेकिन काकोरी काण्ड में आज़ाद जी पकड़े नहीं गये और उन पर इनाम घोषित किया गया, जब काकोरी कांड के आरोपी पकड़े गये तो क्रांतिकारी आन्दोलन का सारा भार आज़ाद जी के उपर आ गया और उन्होंने पुरे भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन को फेला दिया और भगत सिंह के तौर पर उन्हें काफी योग्य साथ मिला


आज़ाद का नेतृत्व जिसमे भगत सिंह भी थें

 

KRANTIKARI AZAD
KRANTIKARI AZAD

आज़ाद के नेतृत्व में काम करने वालों में शायद ही किसी को उनसे कम शिक्षा मिली होगी, अमर शहीद भगत सिंह आदि अपने साथियों के बीच उन्होंने नेतृत्व व्यवहारिक सूझ बुझ, अदम्य साहस और अपने साथियों की चिंता रखकर ही पाया I

स्वभाव से ही मजाकियाँ भगत सिंह ने जब राजगुरु के साथ आज़ाद के नेतृत्व में सहायक पुलिस superintendent   सेडरसन को गोलियों से मार गिराया तो मजाक में उन्होंने आज़ाद से कहा “दल के नेता के रूप में पकड़ें जाने पर आप को तो निश्चिंत रूप से फांसी होगी, आप के लिए दो रस्सो की ज़रुरत पड़ेगीं, एक आप के गलें के लियें और दूसरा आप के इस भारी भरकम पेट के लियें”

उन्हें झिरककर आज़ाद ने कहा “देख पुलिस मुझे रस्सी से बांधकर बंदरियां जैसा नांच नचाती फिरें और फिर फांसी पर टांग दें, ये मुझे कतई पसंद नहीं, जब तक ‘बेम्तुल्ला बुखारा’ (आज़ाद जी ने अपनी पिस्तौल का विचित्र नाम रखा था) मेरे हाथ में है, कोई माई का लाल मुझें नहीं पकड़ सकता है, उन्होंने आगे कहा

“दुश्मनों की गोलियों का हम सामना करेंगें

आज़ाद ही रहें हैं, आज़ाद ही रहेंगें          

उनके अपार स्नेह व व्यक्तिगत विचार ने उन्हें अपने साथियों का प्रिय नेता बना दिया और उनके दिल में अपने लिए ऐसा विश्वाश पैदा कर दिया कि उनके एक कहने से ही उनके साथी प्राण देने को तैयार रहते थें I उनके साथियों में  महान क्रांतिकारी शामिल थे जिनमे भगत सिंह, राजगुरु, सुकुदेव, बकुटेस्वर दत्त आदि थें


प्रयाग के अल्फर्ड पार्क की घटना

AZAD IN PRAYAG PARK
AZAD IN PRAYAG PARK

प्रयाग के अल्फर्ड पार्क, 27 जनवरी 1931 को आज़ाद जी क्रान्तिकारियों से मीटिंग कर रहे थें कि तभी पुलिस की जीप से पुलिस अफसर नाटबावर के साथ सिपाही उतरें, ये देखकर आज़ाद जी ने अपने साथियों को बड़ी मुश्किल से वहां से जाने की आज्ञा दी और अकेले ही उनसे लड़ने के लिए मोर्चा सभांल लिया, सिपाहियों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और कहने लगे “तुम्हारा वारंट है”

पिस्तौल से निशाना लगा कर आज़ाद ने कहा “मेरा वारंट ये है” और चारों ओर से गोलियां बरसने लगी, एक गोली आज़ाद जी को पीछे से पीठ में लगी और तभी ज़वाब में आज़ाद जी ने उस अंग्रेज सिपाही के जबड़े में गोली मारी और उसका जबड़ा उड़ गया I

आज़ाद गोलियां तो चला रहें थे और उनका निशाना भी अचूक था, पर उनकी सारी गोली ख़त्म हो गई, केवल एक गोली उनके पिस्तौल में शेष बची थी I अबतक आज़ाद का शरीर कई गोलियों से छलनी हो चूका था, चालीस से ज्यादा गोलीयां उनको लगी थी, अंतिम गोली जो उनके पास बची थी, उन्होंने अपने मस्तिक पर मार दी और अपने ही हाथों से अपना रक्त करने वाला ऐसा वीर बाकुरा दुनियां के इतिहास में शहीद हो गया I

LAST SEEN OF CHANDRASHEKHAR AZAD
LAST SEEN OF CHANDRASHEKHAR AZAD

आज़ाद ही रहें है आज़ाद ही रहेंगें इस प्रण को निभाने वाला उन्नाव की धरती का वो लाल, दुनियां के सहिदों का सिरमोर सहीद बन गया I गाँव बदरका तू धन्य है . Chandrashekhar Azad in Hindi

अगर आप चाहतें है की मैं इसी प्रकार आपको हमारें देश के महान क्रांतिकारियों की घटना के बारें में बताता रहूँ तो आप मुझे रिप्लाई अवश्य करें ताकि हमारें शहीदों की आत्मा भी जान सकें कि अब भी हमारे भारत देश में ऐसे व्यक्ति मोजूद है, जो सच्चे दिल से इनको जानने के इच्छुक हैं और उनके अन्दर देश के लियें अपनी ओर से कुछ न कुछ करने की अभिलाषा है, चाहे वो समाज सेवा के तौर पर हो या किसी को गाइड करने के तौर पर हो या अन्य किसी रूप में क्यों ना हों

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आपका शुभचिंतक

प्रकाश चाँद जोशी

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