PANCHATANTRA STORIES KE WRITER PANDIT VISHNU SHARMA

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PANCHATANTRA STORIES KE WRITER PANDIT VISHNU SHARMA

पंचतंत्र की कहानियाँ जो हमने कभी ना कभी अपने जीवन में पढ़ी है उसके रचियता पंडित विष्णु शर्मा जी थें, जिन्होंने संस्कृत भाषा में पंचतंत्र लिखी और यह आज से लगभग 2300 वर्ष यानि तीन सौ ईसा वर्ष पूर्व लिखी गई थी। PANCHATANTRA STORIES KE WRITER PANDIT VISHNU SHARMA

आपको जानकार आश्चर्य होगा विष्णु शर्मा जी ने 80 वर्ष की गहन शोध के बाद पंचतंत्र की रचना जंगल में रहते हुए की और बहुत बारीकी से वन में रहने वाले सभी पशु-पक्षियों और जानवरों का अध्ययन किया और उनके साथ अपना पूरा जीवन बिताने के बाद 80 वर्ष की उम्र में जाकर एक नीतिशास्त्र (पंचतंत्र) की रचना की, जिसकी सीख लेकर अनेकों देशों के राजाओं ने इसका अनुसरण किया और अपने शासन को अच्छी कूटनीति के सहारे आगे बड़ाया।


आपको यह पता नही होगा कि पंचतंत्र को पंचतंत्र क्यों कहा गया ?

पंडित विष्णु शर्मा जी ने जब अपनी कहानियों का संग्रह किया तो उन्हें पाँच भागों में यानि पाँच तंत्रों में बाटा गया इसलिए इसका नाम पंचतंत्र पड़ा।

1 मित्रभेद – इसमें 22 कथायें हैं, जिसमें बताया गया है कि दो मित्रों में भेद कैसे डाला जाएँ और उससे कैसे बचा जाये।  

2 मित्रज्यप्राप्ति – इन 6 कथाओं में मित्र कैसे बनाया जाएं, उसके बारे में बताया गया है।   

3 काकोलूकीय – इन 16 कथाओं में बताया गया है कि अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए शत्रु से कैसे मिला जाये और उसका नाश भी कैसे हो सकता है? ये कव्वे और उल्लू के माध्यम से बताया गया है।    

4 लब्ध प्रभाष – इन 11 तंत्रों में शिक्षा दी गई है।  

5 अप्रिक्षीतकारक – इन 14 तंत्रों में बताया गया है कि बिना सोचे-समझे, कोई कार्य जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए और इससे होने वाली हानि के बारे में भी बताया गया है।

और इस प्रकार आप देख सकते हैं कि किस प्रकार पंडित विष्णु शर्मा जी ने महान तंत्रों यानि कथाओं को लिखा और यह सब कथाओं का अनुवाद कई विदेशी भाषाओँ में हुआ और जिनको पढ़कर अरबी, यूरोप आदि देशों ने सीख ली और अपने राज्य का विस्तार भी किया।

हमारे देश की विडंबना देखियें हिंदी भाषा में अनुवाद इन सब विदेशी भाषा में होने के बाद हुआ।       

पंचतंत्र में 75 कथाएं और 1103 पद्द हैं।

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पंचतंत्र से सम्बंधित एक रोचक जानकारी  

पंचतंत्र की रचना में एक कारण और प्रमुख था। महिलारोप्य के राजा अमरशक्ति की तीन पुत्र थें जो अज्ञानी और मुर्ख थें, जिन्हें राजनीति का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था। राजा ने उन्हें सिखाने के लिए अनेकों प्रयास किये परन्तु उन्हें कोई भी शिक्षा नहीं दे सका।

राजा के मंत्रियों ने उन्हें सलाह दी कि वे आचार्य विष्णु शर्मा को उनका प्रशिक्षक नियुक्त करें, वो राजनीति और नीतिशास्त्र सहित सभी शास्त्रों के ज्ञाता थें।

राजा तैयार हो गया और घोषणा की “यदि वे उनके पुत्रों को कुशल राजसी प्रशासक बनाने में सफल होते है तो उन्हें बहुत सा पारितोषिक (ईनाम) दिया जाएगा।“

पंडित विष्णु शर्मा ने कहा कि “हे राजन मैं अपनी विद्या बेचता नहीं हूँ और मुझे किसी भी उपहार कि कोई भी लालसा नहीं है और आपने मुझे सम्मान से बुलाया है और इसलिए मैं आपके पुत्रों को छह महीने के अन्दर कुशल प्रशासक बनाने की शपथ लेता हूँ।

और इस तरह पंडित विष्णु शर्मा जी ने सरल तरीकें से तीनों राजकुमारों को जंगल में रहने वाले जीव-जन्तुओं की कहानियाँ सुनाई, जिसमें नीतिशास्त्र और ज्ञान की बातें भरी हुई थी।

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पंचतंत्र का कई भाषाओं में अनुवाद होना

कई शताब्दियों पुरानी यह कहानी जो संस्कृत में लिखी गई थी, आज भी अमर है और विश्व प्रसिद्ध हैं। पंचतंत्र विश्व के गिने चुने पुस्तकों में से एक है जिसका अनुवाद कई भाषाओं में हुआ।

सबसे पहले इसका विदेशी भाषा, पहलवी में हुआ जिसे हाकिम बुर्जोई ने किया।   

इसके बाद लेरिया भाषा में 570 ई में हुआ और उसके बाद, फ़ारसी से अरबी भाषा में और अरबी से यूनानी भाषा में 1080 ई में हुआ। अरब की भाषा से स्पेनिस भाषा में सन 1251 ई में हुआ।

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इसके बाद 15वीं शताब्दी में जर्मन भाषा में और जर्मन से यूरोप की समस्त भाषाओं में अनुवाद हुआ। पंचतंत्र की कहानियाँ जावा से इंडोनेसिया तक पहुचीं। अब तक 200 भाषाओं में पंचतंत्र का अनुवाद हो चूका है।

पंचतंत्र को सीरियाई भाषा में कलिलग दमनग और अरबी भाषा में कलीलह दमनह कहा जाता है।  

हमारे भारत देश की विडंबना देखिये भारत में सबके बाद संस्कृत से हिंदी भाषा में पंचतंत्र का अनुवाद हुआ।  

पंचतंत्र में अनेकों शिक्षाप्रद कहानियां है जिसके बारे में मैं आगे अपने ब्लॉग में लिखूंगा।

इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारा भारत देश हजारों वर्षों पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी अग्रणी था।PANCHATANTRA STORIES KE WRITER PANDIT VISHNU SHARMA

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