panchatantra story जब गधा गाता है की कहानी

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panchatantra story जब गधा गाता है की कहानी
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panchatantra story जब गधा गाता है की कहानी

panchatantra story जब गधा गाता है की कहानी, गीदड़ ने गधे से कहा “भेया! क्या तुम हर रोज घास ही खाते रहते हो, अरे पास के खेत में इतने खरबूजे हैं कि हम खातें-खातें थक जायेंगें, पर खरबूजे ख़त्म नहीं होंगें। चलों वहीँ पर चलकर मजे से खरबूजे खातें है, छोड़ों इस घास को।“

खरबूजे….अहा गधें के मुहं में पानी भर आया।

दोनों ने भरपेट खरबूजे खायें – मगर कहतें हैं कि जब किसी भूखें को भरपेट खाना मिल जाये तो उसे अनीति सूझने लगती है ऐसी ही अनीति गधे को सूझी तो…..?

आगे की कहानी

रामू धोबी के पास बड़ा ही सुन्दर गधा था और जिसका नाम ही उसने सुंदर रख दिया था। दिन भर वो उससे बहुत काम करवाता था, शाम को खुला छोड़ देता था ताकि वह जंगल में व खेत में जाकर हरी-भरी घास खाकर अपना पेट भर सकें।

उप्पर वालें ने कुछ ऐसे जानवर बनाएं हैं, जो मालिक के सबसे वफादार होते हैं और मालिक के लिए पुरे दिन काम करते हैं और खाना भी नहीं मागते हैं, उनमे सबसे पहले गधे का ही नाम आता है।

सुंदर नाम गधा शाम को पूरी आजादी से खाता-पीता और घूमता। वह बेचारा उस क्षेत्र में अकेला ही था और आस-पास कोई भी उसका मित्र और सगा-सबंधी ना था, जिससे वह बात कर लेता।

कभी-कभी उसके मन में भी ख्याल आता कि “काश! अपना भी कोई दोस्त होता।“

लेकिन ऐसा भाग्य तो हर किसी का नहीं होता है कि उसकी इच्छायें पूरी हो जायें, फिर भी एक आशा के सहारे सभी प्राणी जीवित रहते हैं। यही हाल इस गधे का था, उसे आशा थी कि कभी न कभी उसका मित्र उसे मिल जाएगा, जिसके साथ बैठकर वह अपने मन की बात कर सकेगा।

सुंदर का गीदड़ से मिलना

अचानक एक दिन जंगल से निकलकर एक गीदड़ गाँव की ओर निकल आया। उसने सामने गधे को चरते हुए देखा तो उसका मन बड़ा प्रसन्न हुआ, क्योंकि वह अकेला घूमते-घूमते तंग आ गया था। उसे भी एक मित्र की तलाश थी, गधे के बारे में उसे पता था कि इससे सच्चा मित्र कोई और नहीं।

यह तो ऐसा जानवर है जो बिल्कुल सच्चा मित्र बनने के योग्य है, इससे दोस्ती करके कोई नुकसान होने वाला नहीं है।

गीदड़ ने आगे बड़कर कहा कि “बड़े भाई नमस्ते”

“नमस्ते।” गधे ने उस गीदड़ की ओर बड़े ध्यान से देखा और सोच में पड़ गया कि मुझ जैसे बदनसीब को नमस्ते  करने वाला कौन हो सकता है।

गीदड़ “बड़े भैया क्या सोच रहे हो, क्या हमारे साथ दोस्ती नहीं करोगे?”

“क्यों नहीं….क्यों नहीं…..भैया आज, मैं तो बहुत ही खुश हूँ कि इस क्षेत्र में मुझे राम-राम करने वाला तो कोई मिला, नहीं तो अपना हाल यह था कि कि इस घास और खेती से ही राम-राम कर लेते थें।“


दोनों में दोस्ती होना

गधे की बात सुनकर गीदड़ को हंसी आ गई, उसे हंसता देखकर गधा भी हंसने लगा और बस यहीं से उनकी मित्रता शुरू हो गई।

दुसरे दिन दोनों मित्र फिर वहीँ मिलें तो उस समय गधा घास खा रहा था, गीदड़ ने अपने मित्र से कहा, “बड़े भैया क्या तुम रोज घास ही खाते रहते हो?”

गधा ”भाई पेट ही तो भरना है और यह घास ही तो अपना साथी है।“

गीदड़ “भाई तुम मेरे मित्र हो और आज मैं तुमको एक बढ़िया भोजन खिलाऊंगा। देखों कुछ ही दूर खेत में एक बढ़िया खरबूजे है, उन खरबूजे को खाकर दोनों भाई आनंद लेंगें।“

गधा “खरबूजे….अहा…. ।“ गधे के मुहं में पानी आ गया, कभी उसके मालिक ने किसी त्यौहार में एक खरबूजा खिलाया था। कितना मजेदार था, एकदम स्वादिष्ट और आज गीदड़ उसे खरबूजे खिलाने ले जा रहा है

दावत के लिए खेत में जाना

गधा उसी समय अपने दोस्त गीदड़ के साथ खरबूजों के खेत में चला गया, दोनों मित्रों ने बड़े आनंद से खरबूजे खाए और साथ-साथ बातें भी करते रहे।

मस्त होकर गाना गाना

गधा कुछ अधिक ही खुश हो गया था और वैसे भी प्राणी के एक आदत है कि वह खुश होकर खूब नाचता है, झूमता है, कभी-कभी गाना गाने भी लगता है, यही हाल इस गधे का हुआ। जब उसका पेट अधिक भर गया तो वह भी नाचता हुआ गाना गाने लगा।

गीदड़ ने जब उसके ढेचूं-ढेंचू की आवाज सुनी तो उससे बोला “भैया, इस तरह शौर ना करो – खेत का मालिक आ गया तो अनर्थ हो जाएगा।“ 

panchatantra story जब गधा गाता है की कहानी

भाई मैं शोर नहीं कर रहा राग गा रहा हूँ, राग और तुम जंगल के रहने वाले राग विधा को क्या जानों, गीत तो जीवन का अंग है। जब भी प्राणी का पेट भर जाता है तो वह नाचता है, गाता है, झूमता है। भाई, आज तो मैं बहुत खुश हूँ, मेरा मन करता है कि मैं गाता ही चला जाऊं।“

गीदड़ “बस-बस बड़े भैया, इस गाने की यहीं पर बंद कर दो क्योंकि तुम बेसुरा गीत गा रही हो। ऐसा गीत सुनकर किसान की नींद खुल जायेगी वह आते ही हम दोनों का बाजा बजा देगा।“

गधा “भाई तुम वास्तव में बुजदिल हो।“

गीदड़ “मैं बुजदिल नहीं मौके को देखकर चलता हूँ, किसी विद्वान ने कहा है कि बेवक्त की रागिनी अच्छी नहीं होती।“

गधा “अरे भाई, तुम सात स्वर, इक्कीस मूछ्ना, उनचास ताल, नवरस, छतीस राग, आदि यह सारे पच्चीस गानों के भेद प्राचीन काल से चले आ रहे हैं। यह गीत विधा ही संसार में सबसे उत्तम विधा है।“

गीदड़ “देखों भाई यदि तुम अपनी जिद में अड़े रहे, तो मैं खेत से बाहर किनारे में खड़े होकर इसे सुनता रहूंगा। इस गाने के लिए मैं अपनी जान खतरे में नहीं डाल सकता।“ यह कहकर गीदड़ उस खेत से बहार जाकर खड़ा हो गया, परन्तु गधा तो अपनी धुन में मस्त था। खरबूजा खाकर उसका पेट भर चुका था तो गाने गाता फिर रहा था।


गधे का गाना सुनकर किसकी आँख ना खुलें?

खेत के मालिक की आँख भी खुल गई तो उसने देखा कि गधा उसके खेत में घुस आया और पके हुए खरबूजों को खाकर खेत को भी उजाड़ किया है।

उसने लाठी उठाई और झट से गधे पर लाठी बरसाना शुरू कर दिया, गधा अपना गाना भूलकर बड़ी कठिनाई से जान बचाकर भागा, उसके शरीर के कई भागों से खून निकल रहा था।

रास्ते में गीदड़ ने उससे कहा “क्यों भैया आया गाने का आनदं।“

गधा “भैया गाने की बात छोड़ों, अपने तो शरीर के सारे तार टूट गये, स्वर इस खून में डूब गये।“

समय को देखकर ही सब काम करों, राग अपने समय पर ही अच्छा लगता है। बेवक्त का राग तो प्राणी की हालत गधे जैसी ही बना देता है।

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आपका शुभचिंतक

P C JOSHI

hamaarijeet.com  

 

 

 

 

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