Prasidh Kahani प्रसिद्ध कहानी अनाड़ी की दोस्ती जी का जंजाल

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Prasidh Kahani प्रसिद्ध कहानी अनाड़ी की दोस्ती जी का जंजाल
By Hamaarijeet.com

Prasidh Kahani प्रसिद्ध कहानी अनाड़ी की दोस्ती जी का जंजाल

खटमल जूँ से “घर पर आयें मेहमान से कभी भी बुरा बर्ताव नहीं करते। उसका आदर और सत्कार करते हैं, विद्वानों ने अतिथि की सेवा को प्रभु भक्ति की संज्ञा दी है। फिर तुम मुझे  क्यों भगाना चाहती हो ?” Prasidh Kahani प्रसिद्ध कहानी अनाड़ी की दोस्ती जी का जंजाल

जूँ “इसलिए कि मुझे राजा के क्रोध से डर लगता है, मैं अकेली ही उसका खून पिती हूँ और अब हम दोनों राजा का खून चूसने लगेंगें तो क्या होगा”?  

आगे की पंचतंत्र कहानी…….

एक राजा के सोने के कमरे में सफ़ेद जूँ रहती थी, शाही पलंग में रहने वाली, इस जूँ का पूरा राज, राजा के बिस्तर में चलता था।

यदि राजा इस देश का राजा था तो वह भी इस पलंग की रानी थी, जो राजा का स्वादिष्ट खून पीकर बहुत आनंद से रह रही थी।

बड़े-बुजुर्गों की ठीक ही कहावत है कि “सुखी-प्राणी को देखकर सभी लोग और रिश्तेदार दूर से दोड़े चले आते हैं। सुख के तो सभी साथी होते हैं, परन्तु दुःख में कोई भी साथ खड़ा नहीं होता।”           

इसी प्रकार का हाल जूँ के साथ हुआ, एक खटमल उसके पास आया और जूँ से बोला “मौसी प्रणाम।“

“तुम…… ।“जूँ ने अचंभित होकर उसकी ओर देखा।

“हाँ मौसी जी, मैं हूँ, तुम मेरी मौसी लगती हो ना”   

जूँ “पर, मैं तो तुम्हें जानती नहीं।“

खटमल “तुम मुझे नहीं जानती हो तो क्या हुआ, लेकिन मैं तो तुम्हें जानता हूँ।“

“तुम यहाँ पहुचें कैसे?”        

खटमल “भूख के कारण आना पड़ा।

मैंने सोचा हमारी मौसी जी बड़े आराम से राजा के शाही पलंग में रहकर उसके स्वादिष्ट खून का आनंद ले रही है, तो क्यों ना मौसी जी के पास जाकर कुछ दिनों के लिए राजा के खून का आनंद ले लिया जाये।“ 

जूँ क्रोध में खटमल की ओर देखते हुए “खटमल, तुमने यहाँ आकर बहुत बड़ी गलती की है।“

“क्यों, मौसी?”

जूँ “इसलिए कि राजा लोगों का क्रोध बहुत बुरा होता है

यदि मैं उनका खून का आनंद लेती हूँ तो बहुत ही होशियारी से ताकि राजा को बिल्कुल भी आभास ना हो कि मैं उनका खून पी रही हूँ।“

“और यदि हम दो हो जायेंगें तो राजा को पता चल जाएगा और हम दोनों मारे जायेंगें। भलाई इसी में है कि तुम यहाँ से चले जाओं।“

मौसी जी “घर आये मेहमान से क्या कोई इस तरह का व्यवहार करता है?

बड़े-बुजुर्गों और विद्वानों ने कहा है कि घर पर जब कोई मेहमान आये तो उसका स्वागत करते हुए कहते हैं कि आइयें बैठिये, जलपान ग्रहण करियें……सब कुशल मंगल है या नहीं!…..मौसी !

अतिथि की सेवा को प्रभु की सेवा ही माना गया है।“

जूँ “वह अतिथि सेवा ही किस काम की जिसमें अपनी ही जान की ख़तरा हो।“

खटमल “कैसा ख़तरा मौसी जी……..देखों मौसी, पहले तुम जी भरकर राजा का खून पी लेना और जब तुम्हारा पेट भर जाये तो उसके बाद मैं पी लिया करूंगा।

इसी तरह से बारी-बारी से दोनों अपना काम चलाते रहेंगें और मजे-मजे में जिंदगी भी कट जायेगी, ना ही तुम्हे कष्ट होगा और ना ही राजा को।“

जूँ “देखो खटमल, मैं राजा का खून बड़े आराम से पीती हूँ और मेरे इस प्रकार खून पिने से राजा को कोई भी कष्ट नहीं होता है और ना ही उसे पता चलता है।

तुम ठहरे खटमल जो बिना काटे खून पीते ही नहीं।“

“मौसी जी तुम इसकी बिल्कुल भी चिंता मत करों, मैं इस प्रकार से खून पियूंगा कि राजा को ज़रा सा भी एहसास नहीं होगा।“

जूँ “चलों, सोचती हूँ……. ।“ 

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राजा का कमरे में प्रवेश करना

अभी दोनों बात ही कर रहे थे कि राजा अपने शाही कमरे के अन्दर आ गया और जिसे देखकर दोनों चुप हो गये।

जैसे ही राजा अपने बिस्तर में लेटकर आराम करने लगा तो उसके कुछ देर बाद जूँ ने बड़े मजे में राजा को खून पिया और एक तरफ बैठकर आराम करने लगी।

अब खटमल द्वारा राजा का खून पीना



जब जूँ ने खून पी लिया तो खटमल जो अपनी बारी के इंतज़ार मैं बैठा था, तुरंत उठा और राजा के शरीर पर खून पिने के लिए जा पंहुचा।

थोड़ी देर तक तो वह बड़े आराम से खून पिने लगा, इसका राजा को बिल्कुल भी आभास नहीं हुआ, लेकिन किसी ने  ठीक ही कहा है कि चोर चोरी से तो जा सकता है परन्तु हेरा-फेरी से नहीं।

राजा के स्वादिष्ट खून पिने में वो इतना मग्न हो गया कि वह जूँ से कही गई सभी बातों को भूल गया ।

जल्दी-जल्दी खून पिने के चक्कर में तभी राजा को उसका एक डंक लगा और राजा जोर से चिल्लाया ऊईईईईईईई और वह पूरी तरह क्रोधित हो गया।

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राजा की आवाज सुनकर पहरेदारों का कमरे में आना    

राजा की आवाज सुनकर तुरन्त सिपाही कमरे आ गये तो राजा ने उनसे कहा “इस पलंग में कोई जूँ या खटमल है, जिसने मुझे काटा है।”

इतना सुनकर पहरेदार राजा के बिस्तर को एक-एक करके देखने लगे।

खटमल जो बड़ा होशियार था राजा और सिपाही के आवाज सुनकर तुरंत पलंग की दरार में जा छुपा।

जूँ बेचारी जो कपड़े में चिपकी हुई बैठी थी, उसपर पहरेदारों की नजर पड़ गई,……फिर क्या था, जूँ पकड़ी गई और जिसे एक पहरेदार ने मसलकर मार डाला और खटमल बच गया।

शिक्षा: उपदेश देने से किसी का स्वभाव नहीं बदलता, पानी को जितना मर्जी गर्म कर लो वह फिर से ठंडा हो जाता है, क्योंकि वह उसका स्वभाव है। इसी प्रकार उपदेश द्वारा किसी प्राणी के स्वभाव को नहीं बदला जा सकता है।    


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आप सबका शुभचिंतक

P C JOSHI

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